Garibi Shayari

निर्धनता से मनुष्य मे लज्जा आती है!!
लज्जा से आदमी तेजहीन हो जाता है!!
निस्तेज मनुष्य का समाज तिरस्कार करता है!!
तिरष्कृत मनुष्य में वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाते हैं!!
और तब मनुष्य को शोक होने लगता है!!
जब मनुष्य शोकातुर होता है तो उसकी बुद्धि क्षीण होने
लगती है!!
और बुद्धिहीन मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है!!
वो जिनके हाथ में हर वक्त छाले रहते हैं!!
आबाद उन्हीं के दम पर महल वाले रहते हैं!!
कभी कपड़े के तन पर अजीब लगती हैं!!
अमीर बाप की बेटी गरीब लगती हैं!!
दुनिया में ऐसे लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि!!
भगवान उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता!!
सिवाय रोटी के रूप में!!
!!महात्मा गाँधी!!
रुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने!!
सड़क किनारे वो भिखारी शहंशाह निकला!!
Waqt Garibi Status
गरीब वह नहीं है जिसके पास कम है!!
बल्कि धनवान होते हुए भी जिसकी इच्छा कम नहीं हुई है!!
वह सबसे गरीब है!!
आन्तरिक दरिद्रता ही बाहर की दरिद्रता बनकर प्रकट होती रहती है!!
जब भी मुस्कुराते हुए देखता हूँ!!
भूख से लड़ते परेशान गरीब को पैसे!!
और ख़ुशी का कोई ताल्लुक नहीं!!
ये समझाये कौन किसी अमीर को!!
चेहरा बता रहा था कि मारा है भूख ने!!
सब लोग कह रहे थे कि कुछ खा के मर गया!!
यदपि मैं निर्धन, घ्रणित और उपेक्षित हूँ!!
तथापि परमात्मा!!
हे मेरे परमात्मा मुझकों मत भुला देना!!