Nida Fazli Sher in Hindi

कभी आकाश के तारे ज़मीं पर बोलते भी थे!!
कभी ऐसा भी था जब साथ थीं तन्हाइयाँ और हम!!
मेरे आंगन में आए यां तेरे सर पर चोट लगे!!
सन्नाटों में बोलने वाला पत्थर अच्छा लगता है💓!!
उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा!!
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा!!
उसको रुखसत तो किया था मुझे मालुम ना था!!
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला!!
सबको अत नहीं दुनिया को सत्ता कर जीना!!
जिंदगी क्या है मुहब्बत की जुबान से सुनिए💓!!
Shayari of Nida Fazli
हर चमकती क़ुर्बत में एक फ़ासला देखूँ!!
कौन आने वाला है किस का रास्ता देखूँ!!
अब खुशी है ना कोई दर्द रुलाने वाला!!
हम ने अपना लिया हर रंग जमाने वाला!!
सफर में धूप तो होगी!!
जो चल सको तो चलो!!
सभी हैं भीड़ में!!
तुम भी निकल सको तो चलो!!
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा!!
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा!!
बदल न अपने-आप को जो थे वही रहे!!
मिल्ते रहे सभी से मगर अजनबी रहे!!