Nida Fazli Shayari Hindi

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है!!
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है!!
भटकती रही यूँ ही हर बन्दगी!!
मिली न कहीं से कोई रौशनी!!
छुपा था कहीं भीड़ में आदमी!!
हुआ मुझमें रौशन ख़ुदा देर से!!
कहीं छत थी, दीवारो-दर थे कहीं!!
मिला मुझको घर का पता देर से!!
दिया तो बहुत ज़िन्दगी ने मुझे!!
मगर जो दिया वो दिया देर से!!
घर 🏞️से मस्जिद है बहुत दूर चलो 🌲यूँ कर लें!!
किसी😸 रोते हुए बच्चे को हँसाया 😀जाए!!
यहाँ कोई किसी को रास्ता नहीं देता!!
मुझे गिरा कर अगर तुम संभल सको तो चलो!!
बदला न अपने-आप को जो थे वही रहे!!
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे!!
Shayari of Nida Fazli
गिरजा 🧑🦰में मंदिरों में अज़ानों में बट🏵️ गया!!
होते 🐨ही सुब्ह आदमी ख़ानों में 🐸बट गया!!
ये सब इत्तिफ़ाक़ात का खेल है!!
यही है जुदाई, यही मेल है!!
मैं मुड़-मुड़ के देखा किया दूर तक!!
बनी वो ख़मोशी, सदा देर से!!
सजा दिन भी रौशन हुई रात भी!!
भरे जाम लगराई बरसात भी!!
रहे साथ कुछ ऐसे हालात भी!!
जो होना था जल्दी हुआ देर से!!
दुश्मनी लाख सही!!
यूँ रिस्ता ना खत्म कीजिये!!
दिल मिला या ना मिले!!
हाथ जरूर मिलाते रहिये!!
मिरे बदन में खुले जंगलों की मिट्टी है!!
मुझे सँभाल के रखना बिखर न जाऊँ में!!
हुआ न कोई काम मामूल से!!
गुजारे शबों-रोज़ कुछ इस तरह!!
कभी चाँद चमका ग़लत वक़्त पर!!
कभी घर में सूरज उगा देर से!!
कभी रुक गये राह में बेसबब!!
कभी वक़्त से पहले घिर आयी शब!!
हुए बन्द दरवाज़े खुल-खुल के सब!!
जहाँ भी गया मैं गया देर से!!