Shayari of Nida Fazli

सब की पूजा एक सी!!
अलग-अलग हर रीत!!
मस्जिद जाए मौलवी!!
कोयल गाए गीत!!
मिरे बदन में खुले जंगलों की मिट्टी है!!
मुझे सँभाल के रखना बिखर न जाऊँ में!!
इतना सच बोल कि!!
होंटों का तबस्सुम न बुझे!!
रौशनी ख़त्म न कर!!
आगे अँधेरा होगा!!
!!Nida Fazli!!
मेरी तस्वीर आँख का आँसू!!
मेरी तहरीर जिस्म का जादू!!
मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में!!
मुझको पहचानते नहीं जब लोग!!
सीता रावण राम का करें विभाजन लोग!!
एक ही तन में देखिये तीनो का संजोग!!
Shayari of Nida Fazli
एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक!!
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा!!
!!Nida Fazli!!
हर जंगल की एक कहानी!!
वो ही भेंट वही क़ुर्बानी!!
गूँगी बहरी सारी भेड़ें!!
चरवाहों की जागीरें हैं!!
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है!!
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है!!
अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम!!
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है!!
उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा!!
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा!!
!!Nida Fazli!!
नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान!!
कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान!!