Rahat Indori Best Lines

मैं अपना अज़्म लेके!!
मंज़िलों की सिम्त निकला था!!
मशक्क़त हाथ पे रक्खी थी!!
किस्मत घर पे रक्खी थी!!
अजीब रंग था मज्लिस का!!
ख़ूब महफ़िल थी!!
सफ़ेद पोश उठे काएँ काएँ करने लगे!!
हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा है!!
आज से हमनें तेरा नाम ग़ज़ल रखा है!!
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया!!
मेरे कमरे में भी एक ताजमहल रखा हैं!!
Rahat Indori Love Shayari
कभी कभी बहुत सताता है!!
यह सवाल मुझे!!
कि हम मिले ही क्यों थे!!
जब हमें मिलना ही नहीं था!!
घर की तामीर में हम बरसों रहे हैं पागल!!
रोज दीवार उठाते थे!!
और गिरा देते थे!!
झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले!!
वो धूप है कि शजर इल्तिजाएँ करने लगे!!
मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता!!
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी!!
Rahat Indori Love Shayari
चलो मर जाते है हम तुम पर!!
बताओ दफनाओगे अपने सीने में क्या!!
हम भी अब झूठ की पेशानी को बोसा देंगे!!
तुम भी सच बोलने वालों के सज़ा देते थे!!
ज़मीं पर आ गए आँखों से टूट कर आँसू!!
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे!!