Rahat Indori Love Shayari 2 Line

वास्ता नहीं रखना तो नज़र क्यों रखते हो!!
किस हाल में ज़िंदा हूँ खबर क्यों रखते हो!!
मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को!!
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे!!
तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर!!
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे!!
अब से पहले के जो क़ातिल थे बहुत अच्छे थे!!
कत्ल से पहले वो पानी तो पिला देते थे!!
मैं पर्बतों से लड़ता रहा!!
और चंद लोग गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए!!
Rahat Indori Love Shayari
लगता था कि उनसे!!
बिछड़े तो मर जायेंगे!!
कमाल का वहम था साहब!!
बुखार तक नही आया!!
अंधेरे चारों तरफ़ साएँ साएँ करने लगे!!
चराग़ हाथ उठा कर दुआएँ करने लगे!!
मेरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे!!
मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले!!
वो हमें कोसता रहता था जमाने भर में!!
और हम अपना कोई शेर सुना देते थे!!
कभी कभी नाराज़गी भी जरुरी है क्यूंकि!!
पता तो चले हमे मनाने वाला भी कोई है!!