Love Shayari Rahat Indori

मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो!!
आसमां लाए हो ले आओ ज़मीन पर रख दो!!
अब कहाँ ढूंढने जाओगे हमारे क़ातिल!!
आप तो क़तल का इलज़ाम हमी पर रख दो!!
महकती रात की लम्हों ; नजर रखो मुझ पर!!
बहाना ढूढ़ रहा हूँ ; उदास होने का!!
मै तेरे पास बता किस ; गरज से आया हूँ!!
सबूत दे मुझे चहरे ; शनास होने का!!
राज़ जो कुछ हो इशारों में बता भी देना!!
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना!!
कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं!!
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं!!
यह क्या हमें उड़ने से खाक रोकेंगे!!
कि हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं!!
शहर क्या देखे की हर मंजर में जाले पड़ गए!!
मै अंधेरो से बचा लाया था अपने आप को!!
मेरा दुःख ये है कि मेरे पीछे उजाले पड़ गए!!
Rahat Indori Love Shayari
मुझमे कितने राज़ हैं बतलाऊँ क्या!!
बंद एक मुद्दत से हूँ खुल जाऊं क्या!!
आजज़ी मिन्नत ख़ुशामद इल्तेज़ा!!
और मैं क्या क्या करूँ मर जाऊं क्या!!
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम!!
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे!!
अब ना मै हूँ ना बाकी ज़माने मेरे!!
पाँव फैलाये अंधेरो के दिए कहते है!!
उनका अंजान तुझे याद नहीं है सायद!!
और भी लोग थे खुद को खुदा कहते थे!!
तेरी हर बात मोहब्बत में गँवारा करके!!
दिल के बाज़ार में बैठे हैं खसारा करके!!
मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी!!
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके!!
जवानीओं में जवानी को धूल करते हैं!!
जो लोग भूल नहीं करते भूल करते हैं!!
अगर अनारकली है सबब बगावत का!!
सलीम हम तेरी शर्तें क़बूल करते हैं!!