Gam Bhari Sher Shayari
मेरे प्यार को उसने प्यार ही कब समझा!!
मेरे इकरार को कब इकरार ही समझा!!
मोहब्बत बेपनाह की हमने उससे!!
पर उसने हरदम मजाक ही समझा!!
अक्सर ऐसा होता है कि!!
जिस रिश्ते को हम अपनी ज़िन्दगी मान के चलते हैं!!
वो असल में हमसे ही हमारी ज़िन्दगी छीन रहा होता है!!
मुद्दातों बाद मिले थे कुछ ख्याल तो करते!!
मैं जवाब देने के लिए तैयार था!!
जान तुम सवाल तो करते!!
Gam Bhari Shayari
मोहब्बत मुझे थी उनसे इतनी!!
सनम यादों में दिल तड़पता रहा!!
मौत भी मेरी चाहत को रोक न सकी!!
कब्र में भी दिल धड़कता रहा!!
उसे Online देख कर सोचता हूँ कि!!
आज एक Message कर ही दूँ!!
पर जानता हूँ तेरे औकात से छोटा!!
तेरा Reply आएगा!!
और फिर उस Hmm Accha!!
Okay में मेरा दिल टूट जायेगा!!
तेरी यादों में दिन-रात आंसू बहते हैं!!
आंखें खामोश रहती हैं बस रोती रहती हैं!!
एक बार आ जाओ देखने मेरा हाल!!
बस सांसें चल रही हैं जीवन है बेहाल!!
मुझे मालूम था कि!!
वो रास्ते कभी मेरी मंजिल तक नहीं जाते थे!!
फिर भी मैं चलता रहा!!
क्यूँकि उस राह में कुछ अपनों के घर भी आते थे!!
Gam Bhari Shayari
ये जो मेरे ख़त में भीगी भीगी लिखावट होती है!!
वो स्याही में थोड़ी मेरे अश्कों की मिलावट होती है!!
अब उसके बिना गुजारा है मुश्किल!!
उससे फिर मिल पाना है मुश्किल!!
अब उसकी यादों का सहारा है मुझे!!
कैसे रहूंगा यह बता पाना है मुश्किल!!
उनका इलजाम-लगाने का अंदान!!
इतना बेहतरीन था कि!!
हमने खुद ही अपने खिलाफ गवाही दे दी!!