Bachpan Ke Kavita Hindi Shayari

जो मुस्कुरा रहा है उसे दर्द ने पाला होगा!!
जो चल रहा है उसके पाँव में छाला होगा!!
बिना संघर्ष के चमक नहीं सकता यारो!!
जो जलेगा उसी दीये से तो उजाला होगा!!
वो क्या दिन थे!!
मम्मी की गोद और पापा के कंधे!!
ना पैसे की सोच और ना लाइफ के फंडे!!
ना कल की चिंता और ना फ्यूचर के सपने!!
अब कल की फिकर और अधूरे सपने!!
मुड़ कर देखा तो बहुत दूर हैं अपने!!
मंजिलों को ढूंडते हम कहॉं खो गए!!
ना जाने क्यूँ हम इतने बड़े हो गए!!
देखो बचपन में तो बस शैतान था!!
मगर अब खूंखार बन गया हूँ!!
मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए!!
बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए!!
टूटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन!!
जिंदगी में कभी वापस नहीं मिलता!!
चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से!!
वो बचपन की तरह फिर से मोहब्बत नाप लेते हैं!!
जिंदगी फिर कभी ना मुस्कुराई बचपन की तरह!!
मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे!!
कुछ नहीं चाहिए तुझ से ऐ मेरी उम्र-ए-रवाँ!!
मेरा बचपन, मेरे जुगनू, मेरी गुड़िया ला दे!!
मेरा बचपन भी साथ ले आया!!
गाँव से जब भी आ गया कोई!!
उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में!!
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते!!
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