Bachpan Shayari in Two Lines

बचपन में खिलौना ही खज़ाना था!!
पर उसे छुपाने के लिए तिजोरी पर खर्चा नहीं करना पड़ता था!!
साइकिल से स्कूल जाते हुए मस्ती करना!!
एक-दूसरे की साइकिल को खींचते हुए लड़ना!!
बहुत ही हसीन वक्त था वो भी!!
अब तो उन यारों से बहुत कम होता है मिलना!!
ज्यादा कुछ नही बदलता उम्र बढने के साथ!!
बचपन की जिद समझौतों मे बदल जाती है!!
जिंदगी फिर कभी ना मुस्कुराई बचपन की तरह!!
मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे!!
अच्छाई-बुराई के बारे स्कूल में समझ आया!!
तभी आज मैं एक अच्छा इंसान बन पाया!!
किताबों से था मैंने दिल लगाया!!
अच्छे ज्ञान की वजह से कामयाब हो पाया!!
Bachpan Shayari
इंसान जब बच्चा होता है तब शैतानियां कर के भी मासूम कहलाता है!!
पर जब बड़ा होता है तब मासूम रह कर भी शैतान कहलाता है!!
जो सपने हमने बोए थे नीम की ठंडी छाँवों में!!
कुछ पनघट पर छूट गए,कुछ काग़ज़ की नावों में!!
बचपन से हर शख्स याद करना सिखाता रहा!!
भूलते कैसे है बताया नही किसी ने!!
देर तक दोस्तों के साथ घूमते थे!!
मस्ती में हर पल झूमते थे!!
कॉलेज के दिन ही ऐसे थे!!
जब हम घर जाना भी भूलते थे!!
आज कल हर बच्चे पर ऐसे बोझ बना रखा है!!
जैसे सबसे पहले वही बड़ा होने वाला है!!
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