Bachpan Ka Khilona Shayari

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से!!
कहीं भी जाऊँ मेरे साथ साथ चलते हैं!!
काश मैं लौट जाऊं बचपन की उन हसीं वादियों में!!
ऐ जिंदगी जब न तो कोई जरूरत थी!!
और न ही कोई जरूरी था!!
ज़िन्दगी वक्त से पहले उम्र के तजुर्बे दे जाती है!!
बालों की रंगत ना देखिए!!
जिम्मेदारी बचपन ले जाती है!!
हर पल सुझदी सी नवी शरारत हर किसे नल लांदे सी पंगे!!
जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह!!
मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे!!
Bachpan Shayari
ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो!!
भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी!!
मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन!!
वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी!!
खुशियाँ भी हो गई है अब उड़ती चिड़ियाँ!!
जाने कहाँ खो गई वो बचपन की गुड़ियाँ!!
कुछ अपनी हरकतों से!!
तो कुछ अपनी मासूमियत से!!
उनको सताया था मैंने!!
कुछ वृद्धों और कुछ वयस्कों को!!
इस तरह उनके बचपन से मिलाया था मैंने!!
फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर खुशबु लगाते है!!
वो बच्चे रेल के डिब्बों मे जो झुण्ड लगाते है!!
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