Saccha Bachpan Shayari

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो!!
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे!!
वो रेत पर भी लिख देता था अपनी कहानी!!
वो बचपन था उसे माफ़ थी अपनी नादानी!!
वो बचपन की नींद अब ख्वाब हो गई!!
क्या उमर थी कि शाम हुई और सो गये!!
बचपन की दोस्ती थी!!
बचपन का प्यार था!!
तू भूल गया तो क्या!!
तू मेरे बचपन का यार था!!
बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान अल्लाह!!
तेरे एक को इतना बड़ा मकान!!
Bachpan Shayari
जी लेने दो ये लम्हे!!
इन नन्हे कदमों को उम्रभर दौड़ना है!!
बचपन बीत जाने के बाद!!
ना कुछ पाने की आशा!!
ना कुछ खोने का डर!!
बस अपनी ही धुन!!
बस अपने सपनो का घर!!
काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर!!
दहशत गोली से नही दिमाग से होती है!!
और दिमाग तो हमारा बचपन से ही खराब है!!
फ़क़त माल-ओ-ज़र-ए-दीवार-ओ-दर अच्छा नहीं लगता!!
जहाँ बच्चे नहीं होते वो घर अच्छा नहीं लगता!!
वो बड़े होने से डरता है!!
इसीलिए बचपना करता है!!
Bachpan Shayari!!!
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